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कर्म का विज्ञान (२ पुस्तकों का सेट)

कर्म का विज्ञान, यह २ पुस्तकों का सेट है जिसमें दादाश्री हमें हमारे कर्मो से संबंधित अधिक विस्तार से जानकारी देते है| हमारा अभी का जो जीवन है वह सब हमारे पूर्व कर्मो का ही नतीजा है जिसके लिए कोई और दोषित है ही नहीं| और अभी जो कर्म कर रहे है, उसका फल हमें आने वाले जन्मों में भुगतना पड़ेगा|
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Description

कर्म का विज्ञान, यह २ पुस्तकों का सेट है जिसमें दादाश्री हमें हमारे कर्मो से संबंधित अधिक विस्तार से जानकारी देते है| हमारा अभी का जो जीवन है वह सब हमारे पूर्व कर्मो का ही नतीजा है जिसके लिए कोई और दोषित है ही नहीं| और अभी जो कर्म कर रहे है, उसका फल हमें आने वाले जन्मों में भुगतना पड़ेगा|

अनेक सवाल जैसे, कर्म कैसे बंधते है?कर्मो से कैसे मुक्ति हो?शरीर और आत्मा क्या है? मृत्यु के समय कौन मरता है?क्या कर्मो में बदलाव हो सकते है? अभी आने वाले कर्मो का शांतिपूर्वक किस तरह निपटारा करे?|इत्यादि प्रश्नों के जवाब हमें इन पुस्तकों में मिलते है|

1) मृत्यु के रहस्य

मृत्यु- हमारे जीवन का अविभाज्य अंग है| हर व्यक्ति को अपने जीवन में किसी ना किसी रूप में मृत्यु का सामना करना पड़ता है| किसी अपने परिवारजन या पड़ौसी की मृत्यु देखकर वह भयभीत हो जाता है और मृत्यु से संबंधीत तरह तरह की कल्पनाएँ करने लगता है| कई तरह के प्रश्न जैसे – मृत्यु के बाद इंसान कहा जाता है, क्या उसका पुनर्जनम संभव है, वह किस रूप में पुनः जन्म लेता है इत्यादि उसे भ्रमित कर देते है और मृत्यु का खौफ पैदा करते है|

परम पूज्य दादा भगवान को हुए आत्मज्ञान द्वारा उन्होंने इस रहस्य से संबंधित अनेक प्रश्नों का जवाब दिया है| जन्म और मृत्यु का चक्र, पुनर्जनम, जन्म-मृत्यु से मुक्ति, मोक्ष की प्राप्ति आदि प्रश्नों के सटीक जवाब हमें उनकी पुस्तक ‘मृत्यु के रहस्य’ में मिलती है|

दादाश्री हमें मृत्यु से संबंधित सारी गलत मान्यताओं की सही समझ देकर हमे यह बताते है कि आखिर हमारे जीवन का मुख्य उद्देश्य क्या है और हम किस प्रकार इस चक्कर से हमेशा के लिए मुक्त हो सकते है|

2)  कर्म का विज्ञान

जब भी हमारे साथ कुछ भी अच्छा या बुरा होता है तो हम हमेशा यही कहते हैं कि – यह सब हमारे कर्मो का ही नतीजा है| पर क्या हम जानते है कि कर्म क्या है और कर्म बंधन कैसा होता है?

दादाश्री कहते है कि हमारा सारा जीवन हमारे ही पिछले कर्मो का नतीजा है| जो कुछ भी हमारे साथ अच्छा या बुरा हो रहा हैं, इसके ज़िम्मेदार हम खुद ही है| इस जीवन के कर्मो के बीज तो हमारे पिछले जन्मो में ही पड़ गए थे और अभी हम जो कुछ भी कर रहे है वह सब अगले जन्मों में रूपक में आएगा|

लोग अक्सर यही सोचते है कि अच्छे कर्म और बुरे कर्म क्या होते है और किस प्रकार हम कर्म बंधन से मुक्त हो सकते है? दादाजी इसका जवाब देते हुए कहते है कि जिस काम से किसी का भला हो उसे अच्छे कर्म कहते है और जिससे किसी का नुक्सान हो, तो, उसे बुरे कर्म कहते है| कर्म बंधन से मुक्त होने का सबसे आसान और सरल उपाय यही है कि हम नए कर्मो के बीज ना डाले और अभी जो कुछ भी हो रहा है उसको समता से और समभाव से पूरा करे| ऐसा करने से नए कर्मो के बीज नहीं पड़ेंगे और हम इस जन्म-मरण के चक्कर से मुक्त हो पाएँगे|

कर्म का विज्ञान और उसे चलाने वाली व्यवस्थित शक्ति के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने, ‘कर्म का विज्ञान’, यह किताब ज़रूर पढ़े और अपने जीवन को सुखमय बनाये|

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