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दादा भगवान-4

अंबालालभाई पटेल जो बाद में ज्ञानीपुरुष दादा भगवान के नाम से पहचाने गए, उनकी जीवनकथा चित्रकथा के रूप में दादा भगवान नामक सिरिज़ में दर्शाया गया है। यह पुस्तक उसका चौथा भाग है। इस भाग में उनके विवाहित जीवन और आदर्श व्यावसायिक व्यवहार की कई प्रेरणादायक बातें बताई गई है।.
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Description

दादा भगवान इस काल के महान ज्ञानीपुरुष हो चुके हैं। दैनिक जीवन में होनेवाली हर एक घटना को देखने की और उनमें से सार निकालने की उनके पास वैज्ञानिक दृष्टि थी। जीवन के हर एक पहलू में खड़ी होनेवाली उलझनों के समय वे खुद से ही प्रश्न पूछते थे और उस पर मनन करके उसमें से हल निकालते थे।

घटनाएँ तो जैसी अपनी जीवन में घटती है, वैसी ही ज्ञानी के जीवन में भी घटती है लेकिन हम उसे पूरा करते हैं और वे निकाल करते हैं, उसमें बहुत फर्क होता है। बचपन से ही उनमें विकसित हुई बोधकला और ज्ञानकला, उनके व्यवहार की हर एक उलझन को सरलता से और किसी को भी दुःख न पहुँचे, उस तरह हल ला सकती थी। इस तरह की कई चाबियाँ हमें इस पुस्तिका में से मिलेगी। जो जीवन में खड़ी होनेवाली उलझनों का सरलता से समाधान लाने की दृष्टि खोल देगी।